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History (इतिहास) घूमना ग्राम का इतिहास अत्यंत प्राचीन, गौरवशाली और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध रहा है। यह गाँव अपनी सामाजिक एकता, आध्यात्मिक परंपराओं और घुमावत गोत्र की ऐतिहासिक विरासत के लिए विशेष पहचान रखता है। प्राचीन इतिहास के अनुसार मेरा नगरी (घुमाड़ा) में संवत 921 में मेहरखड़ द्वितीय का शासन था, जो मेव वंश से संबंधित माने जाते हैं। उनके एक रतन कंवर बड़े धर्म के अनुयायी थे। रतन कंवर के पुत्र घाघराए हुए, जिनसे घुमावत गोत्र का उदय माना जाता है।
राजा घुमावत के वंशजों का निकास मेरो नगरी से हुआ। हमारे पूर्वज पहले बड़ी का राजकुमार तथा के बालाजी (काली माता) की ओर गये और घुमावत का आकर बसने लगे। एक समय बाद गाँव के भूमि भाग के समीप आकर बस गया।
कहा जाता है कि सकलानिया गाँव यहाँ प्राचीन सभ्यता का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। यहाँ ठाकुर समाज का समुद्र और विकसित गाँव था। गढ़ेली के समीप यह भूमि संतों की तपोभूमि के रूप में प्रसिद्ध थी।
संतों का यह क्षेत्र प्राचीन काल से एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र रहा है। संवत 1100 के लगभग घुमावत गोत्र के रूप में घूमना गाँव की उत्पत्ति मानी जाती है।
संतों के साधना और आध्यात्मिक वातावरण से प्रेरित होकर हमारे पूर्वज यहाँ स्थायी रूप से बस गए। लोकमान्यता के अनुसार घूमना गाँव के साथ ही यहाँ की पहचान बनी।
गाँव में प्रमुख सामाजिक समुदायों में मीणा समाज, ब्राह्मण समाज, गुर्जर समाज, जाट समाज, राजपूत समाज, नाई समाज, सैनी समाज और अन्य समुदाय शामिल हैं।
यहाँ के प्रमुख धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों में कुल देवी माता मंदिर, दादूदयाल आश्रम, गोसाई बाबा मंदिर और अन्य स्थानीय धार्मिक स्थल शामिल हैं।
ये स्थल गाँव की आस्था, संस्कृति और पहचान के प्रमुख केंद्र हैं।